Jain Campus


जैन समुदाय के लिए एक संदेश!


I son of Mahaveer,

शत्रुंजय, गिरनार और सम्मेद शिखर जैसे महातीर्थ स्थलों पर खतरा, प्राचीन जैन मंदिरों की उपेक्षा, जैन साधुओ पर हमले और प्रायोजित अकस्मात, समुदाय की घटती जनसंख्या, साधार्मिक भाइयों पर गंभीर वित्तीय संकट, जैन बेटियां और परिवार का धर्मांतरण जैसी कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है!

ऐसी गंभीर समस्याओं के बीच हम श्वेतांबर, दिगंबर, तेरहपंथी, स्थानकवासी, मूल संघ, काष्ठ संघ, खरतर गच्छ, अंचल गच्छ, तपा गच्छ, एक तिथि, दो तिथि, तीन थोय, चार थोय जैसे विभिन्न समुदायों में बंट गए है!

मैं और मेरा समुदाय की जगह, मेरे जिनशासन में मेरा समुदाय की भावना को विकसित करना है।

यदि मेरे शब्दों से किसी व्यक्ति व समाज की भावनाएँ आहत होती हैं, तो त्रिविधे मिच्छामि दुक्कड़म।

परंतु समय की मांग है कि हम प्रभु महावीर के अनुयायी जिनशासन के ध्वज के नीचे एक सूत्र में बंधकर जिनशासन की सेवा करें, अन्यथा आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।